Mizoram: चोरी के शक में युवक की पीट-पीटकर हत्या, दो गिरफ्तार

चोरी के शक में युवक की हत्या

Mizoram: आइजोल के पास एक दर्दनाक घटना में, चोरी के आरोप में एक युवक की हत्या के मामले में मिजोरम पुलिस ने विलेज डिफेंस पार्टी (वीडीपी) के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में 31 वर्षीय केटी ज़ोनुनसांगा और 56 वर्षीय आर. लालहमंगईहज़ुआला शामिल हैं। इन दोनों को रविवार को हिरासत में लिया गया और स्थानीय अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 18 दिसंबर को आइजोल से करीब 18 किलोमीटर दूर तुइरियल एयरफील्ड इलाके में हुई। वीडीपी के सदस्यों ने 31 वर्षीय डेविड लालमुआनपुइया और उनके दोस्त लालदुहसाका को चोरी के मामले में संलिप्त होने के शक में पकड़ लिया।

आरोप है कि वीडीपी सदस्यों ने लालमुआनपुइया को कई घंटों तक बेरहमी से पीटा, जिससे उनकी मौत हो गई। पीड़ित की मां नुनथंगमावी ने बताया कि 18 दिसंबर की रात वीडीपी सदस्य उनके घर से उनके बेटे को जबरदस्ती ले गए।

पैसे की चोरी का आरोप

यह आरोप लगाया गया था कि एक पादरी के क्वार्टर से ₹26,000 की चोरी हुई थी, जब वह चर्च में थे। पादरी ने वीडीपी सदस्यों से शिकायत की, जिसके बाद उन्होंने लालमुआनपुइया और उनके दोस्त को पकड़ लिया।

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मां की दर्द भरी गुहार अनसुनी रही

नुनथंगमावी ने आरोप लगाया कि वीडीपी सदस्यों ने उनके बेटे पर बेवजह आरोप लगाया और पूछताछ के दौरान उसे बुरी तरह पीटा। उन्होंने कहा,
“मैंने अपने बेटे की जान बचाने के लिए पादरी और वीडीपी सदस्यों से दया की भीख मांगी, लेकिन मेरी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया।”

कई घंटों की पिटाई के बाद लालमुआनपुइया बेहोश हो गए और उन्हें आइजोल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 19 दिसंबर की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

सार्वजनिक आक्रोश और कार्रवाई की मांग

इस घटना के बाद मिजोरम में जनता का गुस्सा भड़क उठा है। लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सामाजिक संगठन सेंटर फॉर एनवायरमेंट एंड सोशल जस्टिस (सीईएसजे) ने राज्य सरकार से आरोपी वीडीपी सदस्यों पर सख्त कदम उठाने की अपील की है।

सीईएसजे ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो वे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से न्याय की मांग करेंगे।

गृह मंत्री का बयान

राज्य के गृह मंत्री के. सपडांगा ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए सामुदायिक पुलिसिंग से जुड़े लोगों को कानून के दायरे में रहने की सलाह दी है। उन्होंने जनता से संयम बनाए रखने की अपील की है।

वीडीपी कानून पर सवाल

यह घटना मिजोरम पुलिस अधिनियम, 2011 के तहत वीडीपी की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी सवाल खड़े करती है। कई संगठनों ने इस अधिनियम में संशोधन की मांग की है ताकि सामुदायिक पुलिसिंग के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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